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किताब में जी उठा पूरा गांव

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फणिश्वर नाथ रेणु
(11 अप्रैल पुण्यतिथि पर विशेष)
निरूपमा हर्षवर्द्धन त्रिवेदी
हिंदी साहित्य जगत के हस्ताक्षर फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म बिहार के पूर्णिया जिले के औराही हिंगना गांव जो अब अररिया जिले में है, चार मार्च 1921 को हुआ था। रेणु को गांव और उसकी संस्कृति से बेहद लगाव था। यही कारण था कि उनके उपन्यास मैला आंचल और परती परिकथा साहित्य जगत में आंचलिक उपन्यासों के रूप में अपना एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। यद्यपि साहित्य की कई विधाओं में रेणु ने भरपूर लिखा किन्तु उपन्यास के क्षेत्र में परिकथा में ग्रामांचलों के विशद और सवाक् चित्र देखने को मिलते हैं। इन उपन्यासों में ग्रामांचल की छोटी-छोटी घटनाओं, कथाओं, आचार-विचार , रीति-नीति, राजनीतिक अवधारणाओं आदि के विभिन्न रंग बिखरे हुए हैं। मैला आंचल में रेणु का उद्देश्य एक पिछडे अंचल के बहुमुखी यथार्थ के चित्रण के साथ पूरे देश के राजनीतिक माहौल और बदलती हुई मानसिकता का संदेश देना है-
भारत माता ग्राम वासिनी!
खेतों में फैला है- श्यामल,
धूल भरा मैला सा आंचल!
मैला आंचल के माध्यम से रेणु बताना चाहते थे कि भारत माता का आंचल धूल- धूसरित है -उसकी अधिकांश संतानें ग्रामीण परिवेश में रहती हैं और उनकी दशा बेहद खराब है। यदि हमारी धरती मां के आंचल को स्वच्छ करना है तो उसकी उन संतानों की स्थिति सुधारनी होगी जो गांवों में रहते हैं। रेणु ने अंचल के जनजीवन का समग्र चित्र प्रस्तुत करने का श्लाघनीय प्रसास किया है। रेणुजी का रचना संसार विलक्षण है। इसीलिए उनके चाहने वालों में साहित्यकारों के अलावा सामान्य या आम पाठक भी सम्मलित हैं। उन्होंने विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में भी अपने रचना संसार को विस्तार दिया। रेणु जी ने बिहार के समाज-संस्कृति आदि के विषय में भी महत्वपूर्ण पत्रिका दिनमान के लिए स्तम्भ लेखन भी लिखे। रेणु के पात्र आमजन, सरल मन के सामान्य पात्र हैं।


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